Friday, March 6, 2020

हिन्दू पंचांग

हिन्दू पंचांग

🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

 ⛅ दिनांक 07 मार्च 2020
 ⛅ दिन - शनिवार
 ⛅ विक्रम संवत - 2076
 ⛅ शक संवत - 1941
 ⛅ अयन - उत्तरायण
 ⛅ ऋतु - वसंत
 ⛅ मास - फाल्गुन
 ⛅ पक्ष - शुक्ल
 ⛅ तिथि - द्वादशी सुबह 09:05 तक तत्पश्चात त्रयोदशी
 ⛅ नक्षत्र - पुष्य सुबह 09:28 तक तत्पश्चात अश्लेशा
 ⛅ योग - अतिगण्ड 08 मार्च रात्रि 01:07 तक तत्पश्चात सुकर्मा
 ⛅ राहुकाल - सुबह 09:42 से सुबह 11:10 तक
 ⛅ सूर्योदय - 06:55
 ⛅ सूर्यास्त - 18:44
 ⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में
 ⛅ व्रत पर्व विवरण - शनिप्रदोष व्रत, त्रयोदशी क्षय तिथि
  💥 विशेष - द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
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                🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

 🌷 ज्योतिष शास्त्र 🌷

 🙏🏻 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार,फाल्गुन मास की पूर्णिमा(09 मार्च,सोमवार)को किए गए उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं। आज हम आपको होली पर किए जाने वाले कुछ साधारण उपाय बता रहे हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं-

  💰 धन लाभ का उपाय 💰

 🔥 होलिका दहन से पहले जब गड्ढा खोदें,तो सबसे पहले उसमें थोड़ी चांदी,पीतल व लोहा दबा दें। यह तीनों धातु सिर्फ इतनी मात्रा में होनी चाहिए,जिससे आपकी मध्यमा उंगली के नाप का छल्ला बन सके। इसके बाद विधि-विधान से दाण्डा रोपे। जब आप होलिका पूजन को जाएं,तो पान के एक पत्ते पर कपूर,थोड़ी-सी हवन सामग्री,शुद्ध घी में डुबोया लौंग का जोड़ा तथा बताशे रखें।

 🍃 दूसरे पान के पत्ते से उस पत्ते को ढक दें और 7 बार होलिका की परिक्रमा करते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। परिक्रमा समाप्त होने पर सारी सामग्री होलिका में अर्पित कर दें तथा पूजन के बाद प्रणाम करके घर वापस आ जाएं। अगले दिन पान के पत्ते वाली सारी नई सामग्री ले जाकर पुन:यही क्रिया करें। जो धातुएं आपने दबाई हैं,उनको निकाल लाएं।

 ➡ फिर किसी सुनार से तीनों धातुओं को मिलाकर अपनी मध्यमा उंगली के माप का छल्ला बनवा लें। 15 दिन बाद आने वाले शुक्ल पक्ष के गुरुवार को छल्ला धारण कर लें। इस उपाय से धन लाभ के योग बन सकते हैं।
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 🙏🏻 ग्रहों की शांति के लिए उपाय 🙏🏻

 🔥 होलिका दहन की रात उत्तर दिशा में बाजोट (पटिए) पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर मूंग, चने की दाल, चावल, गेहूं, मसूर, काले उड़द एवं तिल की ढेरी बनाएं। अब उस पर नवग्रह यंत्र स्थापित करें। उस पर केसर का जुगाड़ करें, घी का दीपक लगाएं एवं नीचे लिखे मंत्र का जप करें। जप स्फटिक की माला से करें। जप पूरा होने पर यंत्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें, ग्रह अनुकूल होने लगेंगे।
 🌷 मंत्र- ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु शशि भूमि-सुतो बुधश्च।
 गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव: सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु।।
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 👤  बिजनेस में सक्सेस पाने का उपाय 👤

 🏉  एकाक्षी नारियल को लाल कपड़े में गेहूं के आसन पर स्थापित करें और सिंदूर का तिलक करें। अब मूंगे की माला से नीचे लिखे मंत्र का जप करें। 21 माला जप होने पर इस पोटली को दुकान में ऐसे स्थान पर टांग दें, जहां ग्राहकों की नजर इस पर पड़ती रहे। इससे व्यापार में सफलता मिलने के योग बन सकते हैं।
 🌷 मंत्र- ऊं श्रीं श्रीं श्रीं परम सिद्धि व्यापार वृद्धि नम:।

 👰🏻 शीघ्र विवाह के लिए उपाय 👰🏻

 🔥 होली की सुबह एक साबूत पान पर साबुत  सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढ़ाएं तथा पीछे पलटे बगैर अपने घर आ जाएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। जल्दी ही आपके विवाह के योग बन सकते हैं।

  🤕 रोग नाश के लिए उपाय 🤕

 ➡ अगर आप किसी बीमारी से परेशान हैं, तो इसके लिए भी होली की रात को खास उपाय करने से आपकी बीमारी दूर हो सकती है। होली की रात आप नीचे लिखे मंत्र का जाप तुलसी की माला से करें। इससे आपकी परेशानी दूर हो सकती है।
 🌷 मंत्र- ऊं नमो भगवते रुद्राय मृतार्क मध्ये संस्थिताय मम शरीरं अमृतं कुरु कुरु स्वाहा

 💰 धन लाभ के लिए उपाय 💰

 🔥 होली की रात चंद्रमा के उदय होने के बाद अपने घर की छत पर या खुली जगह, जहां से चांद नजर आए, वहां खड़े हो जाएं। फिर चंद्रमा का स्मरण करते हुए चांदी की प्लेट में सूखे छुहारे तथा कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ धूप एवं अगरबत्ती अर्पित करें। अब दूध से चंद्रमा को अर्ध्य दें।
 🌙 अर्ध्य के बाद सफेद मिठाई तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें। चंद्रमा से समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें। बाद में प्रसाद और मखानों को बच्चों में बांट दें। फिर लगातार आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध का अर्ध्य दें। कुछ ही दिनों में आप महसूस करेंगे कि आर्थिक संकट दूर होकर समृद्धि निरंतर बढ़ रही है

                   🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

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હોળી પુનમ / કોરોના વાઈરસની દહેશત વચ્ચે ડાકોરમાં ફાગણોત્સવ કાર્યક્રમ રદ, પદયાત્રીઓ અને શ્રદ્ધાળુઓ દર્શનનો લાભ લઈ શકશે

હોળી પુનમ / કોરોના વાઈરસની દહેશત વચ્ચે ડાકોરમાં ફાગણોત્સવ કાર્યક્રમ રદ, પદયાત્રીઓ અને શ્રદ્ધાળુઓ દર્શનનો લાભ લઈ શકશે
યાત્રાધામ / ડાકોર: રાજ્યમાં કોરોના વાયરસના(corona virus) કારણે અનેક જાહેર કાર્યક્રમો રદ થઈ રહ્યા છે. તો હોળી નિમિત્તે ડાકોરમાં ફાગણોત્સવનું આયોજન કરવામાં આવ્યું હતું તે પણ રદ કરવામાં આવ્યું છે. ખેડા જિલ્લા કલેક્ટરે ડાકોરમાં ફાગણોત્સવ રદ કરવામાં આવ્યો હોવાની જાહેરાત કરી છે. રાજ્ય સરકારના સંગીત નાટક અકાદમી દ્વારા હોળી નિમિત્તે ડાકોરમાં સાંસ્કૃતિક કાર્યક્રમોનું આયોજન કરવામાં આવ્યું હતું.. પરંતુ કોરોના વાયરસના (corona virus) શંકાસ્પદ કેસો વધવાને કારણે આ જાહેર કાર્યક્રમ રદ કરવામાં આવ્યો છે.
યાત્રીકોએ ગભરાવાની જરૂર નથી
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આ અંગે ડાકોર મંદિર કમિટીના મેનેજરે કહ્યું કે, ડાકોર મંદિરના તમામ માણસોને ગ્લોઝ અને માસ્ક આપવામાં આવશે. તેમણે વધુમાં કહ્યું કે, યાત્રીકોએ ગભરાવાની જરૂર નથી. સૂર્ય પ્રકાશમાં વાયરસના કણો નાશ પામે છે હાલમાં ઉનાળો ચાલી રહ્યો હોવાથી વાયરસના કણો વધારે ફેલાશે નહીં. જિલ્લા વહીવટી તંત્ર સાથે આયોજન કરીને આગળની કામગીરી હાથ ધરવામાં આવશે.
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Thursday, March 5, 2020

एकादशी पर विशेष

एकादशी पर विशेष

एकादशी पर विशेष :-
युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा : श्रीकृष्ण ! मुझे फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम और माहात्म्य बताने की कृपा कीजिये ।
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भगवान श्रीकृष्ण बोले: महाभाग धर्मनन्दन ! फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम ‘आमलकी’ है । इसका पवित्र व्रत विष्णुलोक की प्राप्ति करानेवाला है । राजा मान्धाता ने भी महात्मा वशिष्ठजी से इसी प्रकार का प्रश्न पूछा था, जिसके जवाब में वशिष्ठजी ने कहा था :
‘महाभाग ! भगवान विष्णु के थूकने पर उनके मुख से चन्द्रमा के समान कान्तिमान एक बिन्दु प्रकट होकर पृथ्वी पर गिरा । उसीसे आमलक (आँवले) का महान वृक्ष उत्पन्न हुआ, जो सभी वृक्षों का आदिभूत कहलाता है । इसी समय प्रजा की सृष्टि करने के लिए भगवान ने ब्रह्माजी को उत्पन्न किया और ब्रह्माजी ने देवता, दानव, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, नाग तथा निर्मल अंतःकरण वाले महर्षियों को जन्म दिया । उनमें से देवता और ॠषि उस स्थान पर आये, जहाँ विष्णुप्रिय आमलक का वृक्ष था । महाभाग ! उसे देखकर देवताओं को बड़ा विस्मय हुआ क्योंकि उस वृक्ष के बारे में वे नहीं जानते थे । उन्हें इस प्रकार विस्मित देख आकाशवाणी हुई: ‘महर्षियो ! यह सर्वश्रेष्ठ आमलक का वृक्ष है, जो विष्णु को प्रिय है । इसके स्मरणमात्र से गोदान का फल मिलता है । स्पर्श करने से इससे दुगना और फल भक्षण करने से तिगुना पुण्य प्राप्त होता है । यह सब पापों को हरनेवाला वैष्णव वृक्ष है । इसके मूल में विष्णु, उसके ऊपर ब्रह्मा, स्कन्ध में परमेश्वर भगवान रुद्र, शाखाओं में मुनि, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण तथा फलों में समस्त प्रजापति वास करते हैं । आमलक सर्वदेवमय है । अत: विष्णुभक्त पुरुषों के लिए यह परम पूज्य है । इसलिए सदा प्रयत्नपूर्वक आमलक का सेवन करना चाहिए ।’
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ॠषि बोले : आप कौन हैं ? देवता हैं या कोई और ? हमें ठीक ठीक बताइये ।
पुन : आकाशवाणी हुई : जो सम्पूर्ण भूतों के कर्त्ता और समस्त भुवनों के स्रष्टा हैं, जिन्हें विद्वान पुरुष भी कठिनता से देख पाते हैं, मैं वही सनातन विष्णु हूँ।
देवाधिदेव भगवान विष्णु का यह कथन सुनकर वे ॠषिगण भगवान की स्तुति करने लगे । इससे भगवान श्रीहरि संतुष्ट हुए और बोले : ‘महर्षियो ! तुम्हें कौन सा अभीष्ट वरदान दूँ ?
ॠषि बोले : भगवन् ! यदि आप संतुष्ट हैं तो हम लोगों के हित के लिए कोई ऐसा व्रत बतलाइये, जो स्वर्ग और मोक्षरुपी फल प्रदान करनेवाला हो ।

श्रीविष्णुजी बोले : महर्षियो ! फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष में यदि पुष्य नक्षत्र से युक्त एकादशी हो तो वह महान पुण्य देनेवाली और बड़े बड़े पातकों का नाश करनेवाली होती है । इस दिन आँवले के वृक्ष के पास जाकर वहाँ रात्रि में जागरण करना चाहिए । इससे मनुष्य सब पापों से छुट जाता है और सहस्र गोदान का फल प्राप्त करता है । विप्रगण ! यह व्रत सभी व्रतों में उत्तम है, जिसे मैंने तुम लोगों को बताया है ।
ॠषि बोले : भगवन् ! इस व्रत की विधि बताइये । इसके देवता और मंत्र क्या हैं ? पूजन कैसे करें? उस समय स्नान और दान कैसे किया जाता है?
भगवान श्रीविष्णुजी ने कहा : द्विजवरो ! इस एकादशी को व्रती प्रात:काल दन्तधावन करके यह संकल्प करे कि ‘ हे पुण्डरीकाक्ष ! हे अच्युत ! मैं एकादशी को निराहार रहकर दुसरे दिन भोजन करुँगा । आप मुझे शरण में रखें ।’ ऐसा नियम लेने के बाद पतित, चोर, पाखण्डी, दुराचारी, गुरुपत्नीगामी तथा मर्यादा भंग करनेवाले मनुष्यों से वह वार्तालाप न करे । अपने मन को वश में रखते हुए नदी में, पोखरे में, कुएँ पर अथवा घर में ही स्नान करे । स्नान के पहले शरीर में मिट्टी लगाये ।
मृत्तिका लगाने का मंत्र
अश्वक्रान्ते रथक्रान्ते विष्णुक्रान्ते वसुन्धरे ।
मृत्तिके हर मे पापं जन्मकोटयां समर्जितम् ॥
वसुन्धरे ! तुम्हारे ऊपर अश्व और रथ चला करते हैं तथा वामन अवतार के समय भगवान विष्णु ने भी तुम्हें अपने पैरों से नापा था । मृत्तिके ! मैंने करोड़ों जन्मों में जो पाप किये हैं, मेरे उन सब पापों को हर लो ।’                         
स्नान का मंत्र
त्वं मात: सर्वभूतानां जीवनं तत्तु रक्षकम्।
स्वेदजोद्भिज्जजातीनां रसानां पतये नम:॥
स्नातोSहं सर्वतीर्थेषु ह्रदप्रस्रवणेषु च्।
नदीषु देवखातेषु इदं स्नानं तु मे भवेत्॥
‘जल की अधिष्ठात्री देवी ! मातः ! तुम सम्पूर्ण भूतों के लिए जीवन हो । वही जीवन, जो स्वेदज और उद्भिज्ज जाति के जीवों का भी रक्षक है । तुम रसों की स्वामिनी हो । तुम्हें नमस्कार है । आज मैं सम्पूर्ण तीर्थों, कुण्डों, झरनों, नदियों और देवसम्बन्धी सरोवरों में स्नान कर चुका । मेरा यह स्नान उक्त सभी स्नानों का फल देनेवाला हो ।’               
विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह परशुरामजी की सोने की प्रतिमा बनवाये । प्रतिमा अपनी शक्ति और धन के अनुसार एक या आधे माशे सुवर्ण की होनी चाहिए । स्नान के पश्चात् घर आकर पूजा और हवन करे । इसके बाद सब प्रकार की सामग्री लेकर आँवले के वृक्ष के पास जाय । वहाँ वृक्ष के चारों ओर की जमीन झाड़ बुहार, लीप पोतकर शुद्ध करे । शुद्ध की हुई भूमि में मंत्रपाठपूर्वक जल से भरे हुए नवीन कलश की स्थापना करे । कलश में पंचरत्न और दिव्य गन्ध आदि छोड़ दे । श्वेत चन्दन से उसका लेपन करे । उसके कण्ठ में फूल की माला पहनाये । सब प्रकार के धूप की सुगन्ध फैलाये । जलते हुए दीपकों की श्रेणी सजाकर रखे । तात्पर्य यह है कि सब ओर से सुन्दर और मनोहर दृश्य उपस्थित करे । पूजा के लिए नवीन छाता, जूता और वस्त्र भी मँगाकर रखे । कलश के ऊपर एक पात्र रखकर उसे श्रेष्ठ लाजों(खीलों) से भर दे । फिर उसके ऊपर परशुरामजी की मूर्ति (सुवर्ण की) स्थापित करे।
‘विशोकाय नम:’ कहकर उनके चरणों की,
‘विश्वरुपिणे नम:’ से दोनों घुटनों की,
‘उग्राय नम:’ से जाँघो की,
‘दामोदराय नम:’ से कटिभाग की,
‘पधनाभाय नम:’ से उदर की,
‘श्रीवत्सधारिणे नम:’ से वक्ष: स्थल की,
‘चक्रिणे नम:’ से बायीं बाँह की,
‘गदिने नम:’ से दाहिनी बाँह की,
‘वैकुण्ठाय नम:’ से कण्ठ की,
‘यज्ञमुखाय नम:’ से मुख की,
‘विशोकनिधये नम:’ से नासिका की,
‘वासुदेवाय नम:’ से नेत्रों की,
‘वामनाय नम:’ से ललाट की,
‘सर्वात्मने नम:’ से संपूर्ण अंगो तथा मस्तक की पूजा करे ।
ये ही पूजा के मंत्र हैं। तदनन्तर भक्तियुक्त चित्त से शुद्ध फल के द्वारा देवाधिदेव परशुरामजी को अर्ध्य प्रदान करे । अर्ध्य का मंत्र इस प्रकार है :
नमस्ते देवदेवेश जामदग्न्य नमोSस्तु ते ।
गृहाणार्ध्यमिमं दत्तमामलक्या युतं हरे ॥
‘देवदेवेश्वर ! जमदग्निनन्दन ! श्री विष्णुस्वरुप परशुरामजी ! आपको नमस्कार है, नमस्कार है । आँवले के फल के साथ दिया हुआ मेरा यह अर्ध्य ग्रहण कीजिये ।’
तदनन्तर भक्तियुक्त चित्त से जागरण करे । नृत्य, संगीत, वाघ, धार्मिक उपाख्यान तथा श्रीविष्णु संबंधी कथा वार्ता आदि के द्वारा वह रात्रि व्यतीत करे । उसके बाद भगवान विष्णु के नाम ले लेकर आमलक वृक्ष की परिक्रमा एक सौ आठ या अट्ठाईस बार करे । फिर सवेरा होने पर श्रीहरि की आरती करे । ब्राह्मण की पूजा करके वहाँ की सब सामग्री उसे निवेदित कर दे । परशुरामजी का कलश, दो वस्त्र, जूता आदि सभी वस्तुएँ दान कर दे और यह भावना करे कि : ‘परशुरामजी के स्वरुप में भगवान विष्णु मुझ पर प्रसन्न हों ।’ तत्पश्चात् आमलक का स्पर्श करके उसकी प्रदक्षिणा करे और स्नान करने के बाद विधिपूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराये । तदनन्तर कुटुम्बियों के साथ बैठकर स्वयं भी भोजन करे ।
सम्पूर्ण तीर्थों के सेवन से जो पुण्य प्राप्त होता है तथा सब प्रकार के दान देने दे जो फल मिलता है, वह सब उपर्युक्त विधि के पालन से सुलभ होता है । समस्त यज्ञों की अपेक्षा भी अधिक फल मिलता है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है । यह व्रत सब व्रतों में उत्तम है ।’
वशिष्ठजी कहते हैं : महाराज ! इतना कहकर देवेश्वर भगवान विष्णु वहीं अन्तर्धान हो गये । तत्पश्चात् उन समस्त महर्षियों ने उक्त व्रत का पूर्णरुप से पालन किया । नृपश्रेष्ठ ! इसी प्रकार तुम्हें भी इस व्रत का अनुष्ठान करना चाहिए ।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : युधिष्ठिर ! यह दुर्धर्ष व्रत मनुष्य को सब पापों से मुक्त करनेवाला है ।
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हिन्दू पंचांग

हिन्दू पंचांग 

🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

दिनांक 06 मार्च 2020
⛅ दिन - शुक्रवार 
⛅ विक्रम संवत - 2076
⛅ शक संवत - 1941
⛅ अयन - उत्तरायण
⛅ ऋतु - वसंत
⛅ मास - फाल्गुन
⛅ पक्ष - शुक्ल 
⛅ तिथि - एकादशी दोपहर 11:47 तक तत्पश्चात द्वादशी
⛅ नक्षत्र - पुनर्वसु सुबह 10:39 तक तत्पश्चात पुष्य
⛅ योग - सौभाग्य सुबह 07:32 तक तत्पश्चात शोभन
⛅ राहुकाल - दोपहर 11:11 से दोपहर 12:38 तक 
⛅ सूर्योदय - 06:56
⛅ सूर्यास्त - 18:43 
⛅ दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - आमलकी एकादशी
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 💥 विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है lराम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।

💥 आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l

💥 एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।

💥 एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।

💥 जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।
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               🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 आर्थिक तकलीफ़ हो तो  🌷

💰 किसी को आर्थिक तकलीफ़ हो तो होली की पूनम के दिन एक समय ही खाना खायें, एक वक़्त उपवास करें अथवा तो नमक बिना का भोजन करें होली की रात को खीर बनायें और चंद्रमा को भोग लगाकर उसे लें; दिया दिखा दें चंद्रमा को; एक लोटे में जल लेकर उसमें चावल, शक्कर, कुमकुम, फूल, आदि डाल दें और चंद्रमा को ये मंत्र बोलते हुए अर्घ्य दें;

🌷 दधीशंख: तुषाराभम् क्षीरोरदार्णव संनिभम्
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्

🌙 हे चंद्र देव! भगवान शिवजी ने आपको अपने बालों में धारण किया है, आपको मेरा प्रणाम है।

➡ अगर पूरा मंत्र याद न रहे तो “ॐ सोमाय नमः , ॐ सोमाय नमः” , इस मंत्र का जप कर सकते हैं।
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🌷 होली के दिन पूजा विशेष 🌷

🔥 होली के दिन हनुमान जी के पूजा का विशेष विधान है, हो सके तो करना | पूजा का मतलब यह जरूरी नहीं की हनुमान जी के आगे दिया जलायें तब ही वे प्रसन्न होंगे | "श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि", " मनोजवं मारुततुल्य वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं | वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं श्री राम दूतं शरणं प्रपद्ये || " ऐसी प्रार्थना कर दी, वे राजी हो जायेंगे | होली के दिन एक बार जरूर कर लें, बहुत लाभ होगा |

🔥 होली के दिन शास्त्रों में लक्ष्मी माता की पूजा का भी विधान बताया गया है | वह कपूर का दिया जलाकर करें | थोड़ा सा ही कपूर जलायें | होली का पर्व दरिद्रता का नाश करनेवाला पर्व है |
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નાંદોદ તાલુકાના ભદામ ગામના ધોરણ-10ની પરીક્ષા આપવા જતા બે વિદ્યાર્થીઓની બાઇકને નડેલો અકસ્માત એક વિદ્યાર્થીનું ઘટનાસ્થળે કરુણ મોત, બીજાની હાલત ગંભીર.


 નાંદોદ તાલુકાના ભદામ ગામના ધોરણ-10ની પરીક્ષા આપવા જતા બે વિદ્યાર્થીઓની બાઇકને નડેલો અકસ્માત એક વિદ્યાર્થીનું ઘટનાસ્થળે કરુણ મોત, બીજાની હાલત ગંભીર. 

Ⓜ️નર્મદા જિલ્લામાં આજથી શરૂ થયેલ ધોરણ 10 અને 12 ની બોર્ડની પરીક્ષાને નડેલ અકસ્માત નું ગ્રહણ.

 નાંદોદ તાલુકાના ભદામ ગામના ધોરણ-10ની પરીક્ષા આપવા જતા બે વિદ્યાર્થીઓની બાઇકને નડેલો અકસ્માત એક વિદ્યાર્થીનું ઘટનાસ્થળે કરુણ મોત, બીજાની હાલત ગંભીર. 

Ⓜ️ઇજાગ્રસ્ત વિદ્યાર્થીને રાજપીપળા સિવિલમાં સારવાર હેઠળ ખસેડાયો.

 Ⓜ️માંગરોલ હાઈસ્કૂલમાં પરીક્ષા આપવા માટે જવા  નીકળેલા બંને બાઇક સવારને નડેલ અકસ્માત થી શિક્ષણ જગતમાં કરૂણાંતિકા સર્જાઈ.

 Ⓜ️મજુરી કરનાર માતા-પિતાનો લાડકવાયો દીકરો, નવીન વસાવાને મજૂરી ન કરવા દેવી પડે તે માટે ભણાવતા હતા માતા પિતા.

Ⓜ️નવીન ના ઘરે કલ્પાંતના દ્રશ્યો તો બચી ગયેલ ધ્રુવીનને રાજપીપળા સિવિલમાં ખસેડવામાં આવતા પરીક્ષાનું પેપર છૂટી ગયેલ,  વિદ્યાર્થીના માતા - પિતા ચિંતિત.
 રાજપીપળા: આજથી નર્મદા જિલ્લામાં ધોરણ 10 12 બોર્ડની પરીક્ષા શરૂ થઈ હતી ત્યારે પરીક્ષાના પહેલે જ દિવસે પરીક્ષાને અકસ્માત નું ગ્રહણ નડ્યું હતું. જેમાં નાંદોદ તાલુકાના ભદામ ગામના ધોરણ-10ની પરીક્ષા આપવા જતાં બે વિદ્યાર્થીઓની બાઇકને ગુવાર ગામ પાસે અકસ્માત નડતા પરીક્ષા આપવા જનાર એક વિદ્યાર્થીનું ઘટનાસ્થળે કરુણ મોત નીપજ્યું હતું. જ્યારે બીજાને ગંભીર ઈજા થતાં તેની હાલત ગંભીર જણાતા તેને 108 દ્વારા તાત્કાલિક રાજપીપળા સિવિલ હોસ્પિટલમાં સારવાર હેઠળ ખસેડાયા હતા.
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 બનાવની વિગતો અનુસાર રાજપીપળા નજીક આવેલ ભદામ ગામના બે વિદ્યાર્થીઓ નવીનભાઈ સુખાભાઈ વસાવા અને ધ્રુવીન રાજેશ વસાવા બંને વિદ્યાર્થીઓ ભદામ ગામની વલ્લભ નિકેતન વિદ્યા મંદિરના વિદ્યાર્થીઓ ધોરણ 10ની પરીક્ષા આપી રહ્યા હતા. જેમનો નંબર શ્રી સાર્વજનિક વિદ્યાલયમાં હોય માંગરોલના પરીક્ષા કેન્દ્રમાં પરીક્ષા આપવા નીકળ્યા હતા. માતા પિતાના આશીર્વાદ મેળવીને બંને વિદ્યાર્થીઓ પરીક્ષા આપવા સવારે સમયસર બાઈક ઉપર માંગરોલ જવા નીકળ્યા હતા,  ત્યારે ભદામથી મંગરોલ જતાં ગુવાર ગામ પાસે તેની બાઈક સ્લીપ થઈ જતા બાઇક પરથી બંને વિધાર્થીઓ રોડ પર ફંગોળાઇ ગયા હતા, જેમાં પાછળ બેસનાર નવીન વસાવાને ગંભીર ઈજા થતાં તેનું ઘટના સ્થળે જ મોત નીપજ્યું હતું, જ્યારે બાઇકચાલક ધ્રુવીન વસાવાને પણ ગંભીર ઇજા થતાં તેને રાજપીપળા સિવિલમાં ખસેડાયા હતા,  ભદામ અને માંગરોલ ગામમાં ઘેરા શોકનું મોજું ફરી વળ્યું હતું.
આ Video પણ જુઓ:-
https://youtu.be/WDkghy0rBgY

 મરનાર નવીન વસાવાના મૃતદેહને રાજપીપળા સિવિલમાં પોસ્ટ મોર્ટમ  માટે લાવવામાં આવ્યા હતા.

 ઘટના સ્થળે પોલીસ પહોંચી અકસ્માતનો ગુનો નોંધી કાયદેસરની કાર્યવાહી હાથ ધરી છે.

 રિપોર્ટ : જ્યોતિ  જગતાપ, રાજપીપળા

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સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટીના પ્રવાસે આવેલા વડોદરાનો ગુમ થયેલ પરિવારના મૃતદેહ પાંચ દિવસ બાદ ડભોઇ નજીક નર્મદાની નહેરમાંથી મળી આવ્યા

સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટીના પ્રવાસે આવેલા વડોદરાનો ગુમ થયેલ  પરિવારના મૃતદેહ પાંચ દિવસ બાદ ડભોઇ નજીક નર્મદાની નહેરમાંથી મળી આવ્યા

ફાઇલ તસવીર 
Ⓜ️સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટીના પ્રવાસે આવેલા વડોદરાનો ગુમ થયેલ  પરિવારના મૃતદેહ પાંચ દિવસ બાદ ડભોઇ નજીક નર્મદાની નહેરમાંથી મળી આવ્યા

Ⓜ️સીસીટીવી ફૂટેજ ચેક કરતા પોલીસે શોધી કાઢ્યુ 
રાજપીપળા: સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટીના પ્રવાસે આવેલા વડોદરાના પરિવારના મૃતદેહ પાંચ દિવસ બાદ ડભોઇ નજીક નર્મદાની નહેરમાંથી મળી આવ્યા છે. 1 માર્ચે વિશ્વની સૌથી ઉંચી પ્રતિમા નીહાળ્યા બાદ આ પરિવાર ગુમ થયો હતો જે બાદ તેમની પોલીસ દ્વારા શોધખોળ ચાલી રહી હતી. પાંચ વ્યક્તિના મૃતદેહ ડભોઇ પાસેની નર્મદાની કેનાલમાંથી મળી આવ્યા છે. પોલીસે મૃતદેહને બહાર કાઢી પોસ્ટ મોર્ટમ માટે મોકલી આપી આગળની કાર્યવાહી હાથ ધરી છે.
આ video પણ જુઓ:-
https://youtu.be/WDkghy0rBgY





વડોદરાના નવાપુરાનો પરિવાર 1 માર્ચે રવિવારના દિવસે કારમાં સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટી નિહાળવા આવ્યુ હતું. તે બાદ આખો પરિવાર અચાનક ગાયબ થઇ જતા તેમના પરિવારજનોએ કેવડિયા પોલીસ મથકમાં જાણવા જોગ ફરિયાદ નોંધાવી હતી. વડોદરાથી કલ્પેશ પરમાર પોતાની પત્ની તૃપ્તિ પરમાર, માતા ઉષા પરમાર અને પોતાનો એક 9 વર્ષનો છોકરો અને 7 વર્ષની છોકરી સાથે પોતાની GJ 06 KP 7204 માં કેવડિયા સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટી નિહાળવા આવ્યા હતા.બાદ તેઓ સાંજે વડોદરા જવા પરત નીકળ્યા હતા.ઘણો સમય વીતી જવા છતાં તેઓ પોતાના ઘરે ન આવતા એમના અન્ય પરિવારજનો એમની શોધખોળ આદરવા કેવડિયા આવી પહોંચ્યા હતા.અને એમના ગુમ થયાની જાણવા જોગ કેવડિયા પોલીસ મથકમાં ફરિયાદ નોંધાવી હતી.
કેવડિયા પોલીસે સવારથી સાંજ સુધીમાં CCTV ફૂટેજ ચેક કરતા તેઓ સવારે સ્ટેચ્યુ ઓફ યુનિટી પર એન્ટર થતા અને મોડી સાંજે ત્યાંથી પરત જતા નજરે પડી હતી.બીજે દિવસે સવારે સીસીટીવી ફુટેજ ચેક કરતા એ કાર ગરુડેશ્વર તાલુકાના ભાદરવા ગામ પાસેની ક્રિષ્ના હોટેલમાં દેખાઈ હતી.દરમિયાન ત્યાંથી આગળ વધતા વધતા પોલીસ ટીમે ડભોઈથી વડોદરા જતા રસ્તામાં આવતા તમામ પેટ્રોલ પંપ, હોટેલો, દુકાનોના સીસીટીવી ફૂટેજ ચેક કરતા એ પરિવાર ડભોઈ વગાની જયવીર હોટેલમાં જમવા ઉભા રહ્યા હોવાનું જણાઈ રહ્યું હતું. સૂત્રો પાસેથી મળતી માહિતી મુજબ એ પરિવારનું છેલ્લું લોકેશન ડભોઈ તળાવ પાસેનું બતાવતું હતું.

તસવીર, રીપોર્ટ:- જ્યોતિ  જગતાપ , રાજપીપલા
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